Bhartiyam Logo

All Articles & Concept by:Vijay. K. Tewari

Apr 9, 2014

विश्वास और भरोसा टूटने का परिणाम --क्या थप्पड़ और जूता है - तब चुनाव परिणाम ?


विश्वास और भरोसा टूटने का परिणाम --क्या थप्पड़ और जूता है - तब चुनाव परिणाम ?

केजरीवाल को थपप्ड और घूंसा मारे जाने के बाद अनेक तरह की प्रतिकृया सामने आई है , अधिकांश ने
इन घटनाओ को उनके द्वारा इस्तीफा दिये जाने के फैसले से जोड़ कर , बयान दिया है | जिसमे उनकी भर्त्स्ना ही की गयी हैं | घटना
को विद्रुप बना कर राजनीति का हथियार बना कर भी टिप्पणिया की गयी हैं | बयान बाज़ी की इस भीड़ मे ''समझ और संयम " का तो
अभाव ही हैं | परंतु अति उत्साही इन नेताओ और ''समर्थको''' को इस घटना के दूरगामी परिणाम की कोई जान करी नहीं हैं | वे
समझ रहे हैं की इस चुनावी संग्राम मे वे जितना आगे"" बढ """ कर हमले की मुद्रा का ''प्रदर्शन'' करेंगे उतना ही वे अपने नेता की
"" नजरों """ मे आ जाएंगे |परंतु वे भूल जाते है की ''लाभ के साथ हानि "" भी आती है |क्या होगा जब वायदे की झाड़ी के
आश्वासन पूरे नहीं हो पाये ? तब वही हालत होगी जो चिट फंड कंपनी के उन अधिकारियों की होती हैं , जो लोगो से रोज बचत की रकम
एकत्र करते हैं -- गुस्साये लोगो की भीड़ , जिसे वह उनका पैसा लौटाने मे असमर्थ होता हैं | यह अंडे स्याही और घूंसा की घटनाए उसी
का परिणाम अगर है तब तो भगवान ही मालिक है |

इसलिए आज जो लोग बयान देकर आगे बड़ रहे है ,वे भावी की पदचाप
को पहचान नहीं रहे है | यह समय '' संयम ''का हैं , चुनावी प्रति स्पर्धा को महा भारत बनाने का नहीं | और अगर बिना महाभारत
के राजनीतिक आकांछा नहीं पूरी हो रही हैं ---तब यह भी स्पष्ट है की उसका परिणाम भी कनही वैसा ही ना हो जाये जैसे पोहले हुआ था
अर्थात हिंसा का दावानल |नफरत और नापसंदगी को वैमनस्य मे परिवर्तित करने से परिणाम भी स्पर्धा ''जैसा''नहीं होता है |


17 मई को चुनाव परिणाम आने को है ---संभावना गैर कांग्रेस सरकार की है , अब वह पूर्ण बहुमत की होगी
तब तो देश को एक स्पष्ट दिशा मिलेगी | भले ही कुछ लोगो को वह ना पसंद हो , परंतु यथार्थ को झुठलाया नहीं जा सकता परंतु
उसे सच्चे मन से मंजूर करना चाहिए |